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रजिस्ट्रेशन नंबर - 1073/04/2048 Unity is strength

Your preparation, efforts, hard work, and determination decide your success- nothing else. Take the oath to ace your day every morning. Best wishes to you.

Determination plays a huge role in our life. Always be determined on what you want and work thoroughly to reach your goal. Best wishes for you.

To join the trust, send your name and address to the WhatsApp number – 91-9350485590 

चेतावनियाँ
  • गाली देना आपको अनेक इन्टरनेट साइट्स से, अनेक बड़े बड़े अनेक खिलाड़ियों वाले ऑन-लाइन खेलों से प्रतिबंधित करा सकता है।
  • काम पर गालियां देने से, आपकी नौकरी भी जा सकती है।
  • सार्वजनिक स्थलों पर गाली देने से, आप पर जुर्माना हो सकता है, या कुछ देशों या शहरों में तो जेल भी हो सकती है।
GAALI MUKT SAMAJ

Happiness

Happiness is not just a feeling; it is a way of life. You cannot taste success until you're happy doing what you do. Loving what you do is half the battle won.

Belief

You've got to believe. Belief is the only thing that is strong enough to change fate. If you believe it can happen, it will.

Confidence

If you decide, there is nothing you cannot do, nowhere you cannot be. Never let anyone tell you otherwise. You have all that it takes to be a leader, to be the most successful man ever. Confidence will take you places. If you do not take pride in your own strengths, nobody ever will.

Opportunity

Learn to say yes. Seize every opportunity and the world will unfold itself right in front of your eyes. There's so much that can happen. You just need to be ready to take the plunge.

Vision

Set a vision for how you want your life to be. Vision is what makes an achiever out of a dreamer.

Humility

Humility is a sign of a successful man. Never think you're great enough to not learn anything new. You could lose all in a moment. Humility is an asset that will help you get up and get going once again.

GMS TRUST WORKS

Our Branches

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स्वयं को विश्वास दिलाइये कि गाली देना नकारात्मक है: गालियों का उपयोग अनेकों भिन्न भिन्न परिस्थितियों में किया जाता है – आप तब गाली दे सकते हैं जब आप क्रोधित अथवा हताश हों, जब आप किसी मुद्दे पर ज़ोर देना चाहते हों या जब आप विनोदप्रिय दिखना चाहते हों। गाली देना अनेक कारणों से एक अप्रिय आदत है। इससे मूर्खता झलकती है, अथवा चाहे न भी हो परंतु, शिक्षा की कमी भी। यह भयकारक हो सकती है या दूसरे व्यक्ति को धमकी जैसी भी लग सकती है। यह श्रोताओं के लिए अत्यंत वीभत्स और घृणित हो सकती है, जिससे आपकी नौकरी पर बन आ सकती है

Mr. Pramod Pandey

Director

21
शोध से पता चला है कि 21 दिनों में कोई भी बुरी आदत छूट सकती है। इसको अपने लिए लक्ष्य निर्धारित करने हेतु प्रयोग करें – 21 दिनों तक कोई गाली नहीं!
Every Day
व्यायाम से, अपने क्रोध और हताशा को स्वयं से दूर रखिए। यह गाली देने की तो क्या, बोलने तक की आवश्यकता को कम कर देगा, और आपको अच्छी अवस्था में रखेगा – शारीरिक एवं मानसिक, दोनों तरीकों से।
For Your Child
छोटे बच्चों के लिए उदाहरण प्रस्तुत करिए, क्योंकि यदि वे आपको गालियाँ देते हुये देखेंगे तो वे समझेंगे कि यह शान की बात है, और वे भी गालियां देने लगेंगे।
Cool Down
यदि आप इसलिए गाली देते हैं क्योंकि किसी चीज़ ने आपको परेशान कर रखा है, तो 10 तक गिनिए और सचमुच में गहरी गहरी सांसें लीजिये। जितने समय में आप यह सब करेंगे, वह पल गुज़र जाएगा।
Child using bad language

बुरी संगत में रहकर बच्चे अक्सर गाली देना सीख जाते हैं, जिससे उनके भविष्य प्रभावित हो सकता है।

बच्‍चों के साथ किसी भी तरह का गलत व्‍यवहार उनकी पूरी जिंदगी को खराब कर सकता है इसलिए जो भी करें वो बहुत सोच-समझकर करें।

GAALI MUKT SAMAJ
GAALI MUKT SAMAJ
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GAALI MUKT SAMAJ
GAALI MUKT SAMAJ
 कुछ भी बोलने से पहले गौर करे कि आप क्या बोल रहे है ऐसा करेंगे तो गाली के शब्द बहुत कम निकलेंगे और धीरे धीरे ऐसी आदत बिल्कुल छूट जाएगी।
आप अपनी बुरी आदतों को छोड़ने की चिंता करने के बजाय अच्छी आदतें डालना शुरू करें। जीवन में उन सभी आदतों को शामिल करें जिनसे अच्‍छा होता हो। जैसे सुबह जल्दी उठना, किसी असहाय की सहायता करना, प्रतिदिन नहीं जा सकते तो प्रति गुरुवार को मंदिर जाना, माता-पिता के प्रतिदिन पैर छूना, अच्छे प्रवचन सुनना, लोगों से विनम्रता से बात करना आदि। 
 
अभ्यास से जन्मीं आदतों में बहुत शक्ति होती है। हमें अपनी शक्ति को अच्छे काम में रूपांतरित करना चाहिए। हम में अनं‍त ऊर्जा है, बस उसे सही जगह इस्तेमाल करने की जरूरत है।

Poonam Pandey

Trusty

धैर्य रखिए: गालियां देने की आदत शायद आपको वर्षों में पड़ी होगी और आपको लगने लगा होगा कि यह आपकी भाषा का ही हिस्सा हैं। किसी भी पुरानी आदत की तरह, इस आदत को भी जल्दी से छोड़ पाना असंभव ही है। स्वयं को गालियां देने से रोकना एक प्रक्रिया है, किसी दिन आप कर पाएंगे और किसी दिन नहीं, मगर प्रयास जारी रखना महत्वपूर्ण है। स्वयं को याद दिलाइए कि आप ऐसा क्यों कर रहे हैं और कल्पना करिए कि जब आप यह आदत छोड़ देंगे तो आपको कितना अच्छा लगेगा।

  • आप चाहे जो भी करें, परंतु प्रयास न छोड़ें। आत्मनियंत्रण बनाए रखें और स्वयं को याद दिलाते रहें कि आप जो भी करने की ठान लेते हैं, उसे कर के ही रहते हैं!

Pramod Pandey

Founder

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गालियों के स्थान पर हानिरहित शब्दों का प्रयोग करें: एक बार जब आपने अपनी गाली देने की आदत को जान लिया हो, आप अपनी बोलचाल की भाषा में से उन गालियों को निकालने की कोशिश शुरू कर सकते है। जब आप बिना किसी वजह के गालियों का प्रयोग करते हैं – आप क्रोधित नहीं हैं, और गाली बस यूं ही नहीं निकल गई है – आप गाली का प्रयोग, तकिया-कलाम की तरह कर रहे हैं। आप इस समस्या का समाधान, गाली के स्थान पर कोई हानिरहित शब्द का प्रयोग करके कर सकते हैं, जो उसी अक्षर से शुरू होता हो या उस जैसी ध्वनि करता हो, और अभद्र भी न हो।

  • जैसे कि, “मा….” के स्थान पर “माता के जय” या “ब…..” के स्थान पर “बहुत खूब” कहने का प्रयास कीजिये। यह शब्द कहते समय शुरू में आपको हास्यास्पद लग सकता है, मगर कुछ समय बाद इसकी आदत पड़ जाएगी। इस प्रकार के अर्थहीन शब्दों से आपकी नकारात्मकता अभिव्यक्त करने की आवश्यकता पूर्णतया समाप्त हो जाएगी।
  • यदि आप भूल से कभी गाली दे भी जाएँ, तब तुरंत उस चुने हुये वैकल्पिक शब्द का प्रयोग करिए। कालांतर में, आपका मस्तिष्क उन दोनों में संबंध स्थापित कर लेगा और आप जान बूझ कर एक के स्थान पर दूसरे का प्रयोग करने लगेंगे।

Trusty
Mr. Krishna Kumar Pandey

Core Committee Members

Suraj Pandey

आज के समय में गाली देना बहुत साधारण सी बात है. हर छोटी बात पर गाली निकलती है. चाहे व्यक्ति दोस्तों के साथ हो या गुस्से में हो यहाँ तक कि खुश भी हो तब भी गाली दे देता है. और इसमे मां, बहन, और बेटियों की गाली का प्रयोग ज्यादा होता है गाली देने वाला व्यक्ति अपने संस्कारों और शिक्षा का परिचय देता है,

Sumit Sharma

गाली-गलौज का अर्थ है, सामाजिक रूप से भाषा की आक्रमक उपयोग । हिन्दी में इसे अपशब्द भी कहते हैं। गाली को प्रायः अपमानजनक माना जाता है और छोटी गालियों से बड़ी गालियाँ और अन्ततः मारपीट तक हो जाती है किसी महिला को गाली देना ईपीसी की धारा 504 के तहत जुर्म है

Guru Bhagat Singh

नफरत से नफरत बढ़ती है प्यार से बढ़ता प्यार। गाली से गाली बढ़ती है और बढ़ता रार।। ये हैं मेरा विचार।। ऊंच नीच और भेद भाव की तोड़ो सब दीवार। आओ मिलकर साथ चले हम जीवन है दिन चार।

Anoop Vinod Jha

हर जगह कुछ लोगों के मुँह से माँ की गाली देना। ज़रा सी गुस्सा आयी नहीं कि सामने वाले को माँ या बहन की गाली सुना देना। आपने ध्यान दिया हो तो माँ की गाली में जो शब्दों का प्रयोग है वो इतना स्तरहीन है कि मैं यहां लिख भी नहीं सकता। इसलिए हमेशा मन में यह ज्वार उठता है कि क्या हमारा गाँव, कस्बा, नगर और देश कभी गाली मुक्त हो सकता है?

कई लोग हर बात में गाली दिए बिना क्यों नहीं रह पाते?
बहुत अच्छा सवाल है ये पहले मै भी यही सोचती थी कि कुछ लोग ऐसे क्यू होते है जो हर बात में गाली देकर बात करते है ।तब धीरे धीरे बात करते करते लोगो से समझ में आया कि उन लोगो को एक आदत बन गई है जो उनसे जल्दी छूटती नहीं है। ओर इस आदत का बन जाना का एक कारण ये है कि उनको बचपन से किसी ने रोका टोका नहीं जिससे उनको यह आदत बन गई ।ऐसे लोगो के साथ के लोग भी आपको वैसे ही मिलेगे जो हर बात में गाली दे।

कभी कभी तो ऐसा लगता है आजकल कुछ लोग इसको बहुत अच्छा समझते है ओर बहुत खुश होते है कि हम ऐसे बात करते है।पर वो शायद ये नहीं समझ पाते कि जो लोग गाली पसंद नहीं करते उनको ऐसे लोग अच्छे नहीं लगते ।ओर अब अगर आप कोशिश भी करो ना इस आदत को बदलने की तो नहीं बदल सकती जल्दी क्यूंकि जो आपको विरासत में संस्कार मिले है वो कैसे बदल सकते है । तीस चालीस साल का तजुर्बा आपसे कैसे एकदम से चला जाएगा।

इसलिए अच्छा यही है कि अगर आप ऐसे लोगो को पसंद नहीं करते है तो उनसे दूर ही रहें अगर वो कुछ बोल देंगे तो उनके लिए ये कोई बड़ी बात नहीं होगी लेकिन आपको बहुत गहरी भी लग सकती है उनकी बात ।उनका मजाक आप पर भारी भी पड़ सकता है
आप किसी के सामने दूसरों की आलोचना करनी बंद कर दें तो गालियां देने की आदत बंद हो जाएगी।

Bharat Bhushan Pandey

आज के व्यस्तता दैनिक जीवन में लोग जिस तरह से अच्छे भोजन, अच्छे कपड़े, एवं अच्छे वस्तुओं का सोच समझ कर चयन करना नही भूलते है ठीक उसी तरह से अपने मुख से क्रोध में वाणी को व्यक्त करते हुए अच्छे शब्दों का चयन करके सभ्यता एवं अपने संस्कार का परिचय देना चाहिए गालियों से दूरी बहुत ही जरूरी सभ्यता से नाता जोड़े गालीयों से नाता तोड़े

••• मौन, क्रोध की सर्वोत्तम चिकित्सा है।
••• मन की एकाग्रता ही समग्र ज्ञान है।
••• खुद को कमजोर समझना सबसे बड़ा पाप है।
••• चिंतन करो, चिंता नहीं; नए विचारों को जन्म दो।
••• जितना बड़ा संघर्ष होगा, जीत उतनी ही शानदार होगी।
••• जिसके साथ श्रेष्ठ विचार रहते हैं, वह कभी भी अकेला नहीं रह सकता।

ये 5 तरीके हैं, जिनसे कभी नहीं देगा आपका बच्चा गाली, आज से ही करें शुरू
1. तुरंत टोकना शुरू करें

वैसे तो बच्चे घर वालों के सामने गाली नहीं देते हैं और आगे-पीछे ही अपशब्दों का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन यह आदत लंबे समय तक नहीं छिपती है और बच्चा गलती कर ही देता है। अगर बच्चा आपके सामने गाली ते तो उसे तुरंत रोकें और प्यार से समझाएं। उसे बताएं कि वह एक अच्छा बच्चा है और उसके मुंह से गालियां सुनना बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता है

2. संगत पर नजर रखना जरूरी

अगर आपने बच्चे को सामने गाली देते नहीं देखा है, लेकिन आपको पता है कि वह गलत संगत में पड़ रहा है, तो आपको ध्यान रखना होगा। इसलिए सिर्फ आपको अपने बच्चों पर नहीं बल्कि उसके दोस्तों पर भी नजर रखनी है। अगर उसके दोस्त गाली देते हैं, तो आपका बच्चा भी जरूर गाली देना सीख जाएगा। इसलिए उसे बुरी संगत से दूर रखना जरूरी है।

3. उसकी पढ़ाई पर ध्यान रखना

बच्चा पढ़ाई में कैसा परफॉर्म कर रहा है, यह भी देखना बहुत जरूरी है। अगर उसके मार्क्स अच्छे नहीं आ रहे हैं और घर पर उसका पढ़ाई में मन नहीं लग रहा है, तो उसे समझना बेहद जरूरी है। ऐसा इसलिए क्योंकि बच्चे जब बुरी संगत में पड़ जाते हैं, तो उन्हें पढ़ाई करना अच्छा नहीं लगता है। बच्चे के पढ़ने की आदत डालें और नियमित रूप से उसके टीचर के संपर्क में बने रहें।

4. प्रेरणात्मक कहानियां सुनाएं

अपने बच्चे को बचपन से ही प्रेरणात्मक कहानियां सुनाना शुरू कर दें। रामायण, महाभारत और दूसरी प्रेरणात्मक कहानियां सुनाएं। उससे बच्चे में नैतिक शिक्षा का विकास होगा और उस पर किसी बुरी संगत का असर नहीं होगा। जो माता-पिता बच्चों को बचपन से ही अच्छी आदतें सिखाने लग जाते हैं, वे कभी बुरी संगत में पड़ते ही नहीं हैं।

5. अच्छे और बुरे में फर्क समझाएं

बच्चे को अच्छाई और बुराई व उनके परिणाम में फर्क बताना जरूरी होता है। जब तक आप उसे यह नहीं बताएंगे उसे कैसे पता चलेगा कि वह किस लाइन में है। उन्हें अच्छे और बुरे लोगों की पहचान करना सिखाएं ताकि कभी भी वह भविष्य में कभी भी वह बुरे लोगों के जाल में न फंसे।

सकारात्मक विचार करने का अभ्यास करिए

 गाली देना छोड़ने के लिए सकारात्मक विचार आवश्यक हैं। इसका कारण यह है कि लोग गालियां तब देते हैं जब वे या तो शिकायत कर रहे होते हैं, बुरी मनःस्थिति में होते हैं अथवा सामान्यतया नकारात्मक होते हैं। सकारात्मक ढंग से विचार करने से आप गालियां देने की आवश्यकता को ही समाप्त कर दे रहे हैं। मानते हैं कि, सकारात्मक ढंग से विचार करना कठिन है। यदि आपका झुकाव नकारात्मक विचारों अथवा मनोभावों की ओर हो रहा हो तो बस रुकिए, एक गहरी सांस लीजिये और स्वयं से पूछिए कि, “क्या यह वास्तव में महत्वपूर्ण है?”[३]

  • उदाहरण के लिए, स्वयं से पूछिए “यदि मैं मीटिंग में कुछ मिनट देर से पहुंचुंगा तो ऐसा क्या हो जाएगा? या “क्या यह वास्तव में महत्वपूर्ण है कि यदि मैं रिमोट नहीं खोज पा रहा हूँ और टेलीविज़न पर जा कर चैनल बदलने पड़ते हैं?” किसी भी परिस्थिति को सही परिप्रेक्ष्य में देखने से आपको शांति मिल सकती है और आप नकारात्मक मनोभावों पर विजय प्राप्त कर सकते हैं।
  • इसके साथ ही, आपको अपनी गाली देना रोकने की क्षमता के संबंध में सकारात्मक ढंग से सोचने की आवश्यकता है। यदि आपका नकारात्मक रवैया है और आपको अपनी सफलता में संदेह है, तो आप शुरुआत से ही असफलता की तैयारी कर रहे हैं। स्वयं को याद दिलायेँ कि यदि लोग धूम्रपान छोड़ सकते हैं या संतुलित आहार लेकर सैकड़ों पौंड वज़न कम कर सकते हैं तो तो आप निश्चय ही गालियां देना छोड़ सकते हैं!

अपने शब्द संग्रह का विस्तार करें: गालियों का प्रयोग “उचित वैकल्पिक शब्द की अनुपलब्धता” के कारण किया जाता है। परंतु इस बहाने के साथ समस्या यह है कि ऐसे बहुत से शब्द उपलब्ध हैं जो अभिव्यक्ति के लिये, गाली से कहीं अधिक अर्थपूर्ण एवं सारगर्भित होते हैं। अपने शब्द संग्रह के विस्तार से और सर्वाधिक प्रयुक्त गालियों को वैकल्पिक शब्दों के समूह से स्थानापन्न करने से, आप पहले से कहीं अधिक बुद्धिमान, खुशमिजाज़ और शांतचित्त प्रतीत होने लगेंगे।

  • अपनी चुनिन्दा गालियों की एक सूची बनाइये, तब एक शब्दकोश अथवा पर्यायशब्दकोश की सहायता से विकल्पों का चयन करें। जैसे कि हर समय, सुबह दोपहर, शाम “बेहूदा” कहने के स्थान पर अधिक वर्णनात्मक तथा हास्यप्रद शब्दों, जैसे बकवास, बेकार तथा अनर्गल आदि का प्रयोग करें।[३]
  • आप अपने शब्द संग्रह को, समाचार पत्र और पुस्तकें पढ़ कर, और भी विस्तृत कर सकते हैं। जो भी वर्णनात्मक शब्द आपको मज़ेदार लगें, प्रयास करके उनको अपने वाक्यों में प्रयोग करिए। साथ ही, गालियां देते रहने के स्थान पर, दूसरों की बातों को गौर से सुनने का प्रयास करिए तथा उनके द्वारा अपनी अभिव्यक्ति के लिए प्रयुक्त शब्दों और मुहावरों को ध्यान में रखिए।

गाली रोकने के कानून:

 

एक दूसरे को अश्लील गालियां देना भारतीय दंड संहिता की धारा 294 में दंडनीय अपराध है। धारा 294 राजीनामे के योग्य धारा भी नहीं है, अर्थात इस धारा में दोनों पक्ष का राजीनामा भी नहीं कर सकते क्योंकि गालियां देने से केवल पीड़ित पक्षकार को तकलीफ नहीं होती है अपितु समस्त समाज को तकलीफ होती है। इसलिए इस धारा में राजीनामा भी नहीं किया जा सकता।

 


संहिता की इस धारा के तहत आरोपियों को 3 महीने तक की सजा हो सकती है। हालांकि साधारण तौर पर इस अपराध में आरोपियों को किसी प्रकार का जेल का दंड नहीं दिया जाता है बल्कि जुर्माना भरवाया जाता है लेकिन यह मुकदमा कई वर्षों तक चलता है और इतने ही वर्षों तक आरोपियों को अदालत में हाजिरी के लिए जाना पड़ता है। बकायदा जमानत भी लेना होती है। एक संक्षिप्त मुकदमे की प्रक्रिया से यह मुकदमा चलता है। भारतीय दंड संहिता में इस धारा को गाली गलौज के तौर पर उल्लेखित नहीं किया गया है, अपितु अश्लील शब्द या अश्लील गाने से उल्लेखित किया गया है। आमतौर पर जब लोगों के बीच किसी व्यवहार को लेकर कोई विवाद होता है तब एक दूसरे को अश्लील शब्दों में गालियां भी दी जाती है।


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